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⚖️ आपराधिक कानून 📅 17 अक्टूबर 2026 ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

दिल्ली मजिस्ट्रेट ने CJP प्रमुख अभिजीत दीपके की रिहाई का दिया आदेश

दिल्ली के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS के तहत हिरासत में लिए गए CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को शांति बांड की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।

⚡ त्वरित सारांश

नई दिल्ली के एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया है। दिल्ली पुलिस ने उन्हें कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत निवारक हिरासत में लिया था। उनकी रिहाई इस शर्त पर की गई है कि वह एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए पीस बांड का पालन करेंगे।

📌 मुख्य बातें

  1. CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत के बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने रिहा करने का आदेश दिया।
  2. दिल्ली पुलिस ने BNSS की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई की थी।
  3. दीपके को एक साल तक सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए पीस बांड की शर्तों का पालन करना होगा।

📋 केस एक नज़र में

अदालतस्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट, मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन
बेंचस्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट
केसIn re Abhijeet Dipke
तारीख2026-10-17
कानून / मुद्दाभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 126 और 170

नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में तैनात स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश शनिवार को दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें एक प्रस्तावित सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले निवारक हिरासत (Preventive Detention) में लिए जाने के बाद आया।

पुलिसकर्मियों ने दीपके को कनॉट प्लेस में होने वाले एक पूर्व-नियोजित प्रदर्शन को रोकने के मकसद से हिरासत में लिया था। कार्यपालक मजिस्ट्रेट का यह फैसला सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा उठाए जाने वाले एहतियाती कदमों और आपराधिक प्रक्रिया के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के बीच संतुलन को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

इस पूरे मामले की शुरुआत शुक्रवार दोपहर को हुई, जब 20 से अधिक दिल्ली पुलिसकर्मी झंडेवालान स्थित अभिजीत दीपके के आवास पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें एक औपचारिक नोटिस थमाया, जिसमें उन्हें ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने की हिदायत दी गई थी जिससे आम नागरिकों, यात्रियों, व्यापारियों और मरीजों को कोई परेशानी या असुविधा हो।

इसके बाद शुक्रवार शाम को पुलिस ने दीपके को उस वक्त हिरासत में ले लिया जब वे कनॉट प्लेस की तरफ जा रहे थे। वे सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। इस कार्रवाई के दौरान दीपके के साथ हिरासत में ली गईं नेहा बोरा को कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया।

यह कार्रवाई CJP प्रतिनिधियों से जुड़े पहले के प्रशासनिक टकरावों के बाद हुई है। इससे पहले, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाते समय दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही दीपके और पार्टी के अन्य नेताओं सौरभ दास व आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया था। उस घटना के बाद उन्हें एक साल तक शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शांति बांड (Peace Bond) भरने पर रिहा किया गया था।

हाल ही में, 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर प्रवेश करने के आरोप में सौरभ दास और आशुतोष रांका को फिर से हिरासत में लिया गया था। उस मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने माना कि उनके द्वारा शांति बांड का उल्लंघन करने पर कार्रवाई के पर्याप्त आधार हैं, जिसके बाद दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया गया।

कोर्ट ने क्या कहा

मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने पर प्राधिकारी ने दीपके की निवारक हिरासत की समीक्षा की। मजिस्ट्रेट ने तय किया कि दीपके को आगे और हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है और उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया।

यह रिहाई कुछ प्रशासनिक शर्तों के अधीन की गई है। मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया कि दीपके को एक शांति बांड का पालन करना होगा, जिसके तहत उन्हें एक वर्ष की अवधि के लिए सार्वजनिक शांति और व्यवस्था बनाए रखने का औपचारिक वचन देना होगा।

यह प्रशासनिक आदेश लागू होने के साथ ही प्रभावी हो गया, जिसमें बांड की शर्तें पूरी होने पर अधिकारियों को इस राजनीतिक नेता को रिहा करने का निर्देश दिया गया।

कानून आसान भाषा में

पुलिस ने अभिजीत दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के दो विशिष्ट प्रावधानों—धारा 126 और धारा 170 के तहत कार्रवाई शुरू की थी। ये कानूनी प्रावधान किसी अपराध की सजा देने के बजाय संभावित अपराध को रोकने के एहतियाती साधन हैं।

BNSS की धारा 170 एक पुलिस अधिकारी को बिना किसी पूर्व वारंट या मजिस्ट्रेट के अदालती आदेश के निवारक गिरफ्तारी (Preventive Arrest) करने का अधिकार देती है। यह अधिकार तब इस्तेमाल किया जाता है जब अधिकारी के पास यह मानने का ठोस कारण हो कि किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) को रोकने के लिए ऐसी गिरफ्तारी जरूरी है, जिसे अन्यथा नहीं रोका जा सकता।

वहीं, BNSS की धारा 126 कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) को यह शक्ति देती है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक शांति भंग करने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की आशंका हो, तो उसके खिलाफ एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं। इस कानून के तहत, व्यक्ति पर मुकदमा चलाने के बजाय उससे एक तय समय तक शांति बनाए रखने के लिए बांड भरवाया जा सकता है।

आम लोगों पर असर

निवारक हिरासत से जुड़े कानूनों का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है। आम जनता, राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों के दृष्टिकोण से प्रशासन इन उपायों का उपयोग व्यस्त बाजारों में अचानक होने वाले व्यवधान, ट्रैफिक जाम या कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए करता है।

वहीं दूसरी ओर, ये कानूनी प्रक्रियाएं सीधे तौर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को प्रभावित करती हैं जो अपनी बात रखने के लिए एकत्र होना चाहते हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले नागरिकों को यह समझना चाहिए कि हस्ताक्षरित शांति बांड की शर्तों का उल्लंघन करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसमें दोबारा गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत में भेजा जाना शामिल है, जैसा कि CJP के अन्य नेताओं के मामले में देखा गया।

ऐसी स्थिति में क्या करें

  • यदि पुलिस निवारक कार्रवाई के तहत आए, तो उनसे हमेशा औपचारिक कानूनी नोटिस मांगें और उन धाराओं की जानकारी लें जिनके तहत कार्रवाई की जा रही है।
  • अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों या कानूनी सलाहकार (Advocate) को तुरंत सूचित करें कि आपको किस पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा है।
  • पुलिस द्वारा दिए गए सभी नोटिसों, लिखित आदेशों और जमा कराए गए निजी सामान की रसीदों को संभालकर रखें।
  • कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने पर कानूनी प्रक्रिया का पालन करें और मांगे गए शांति बांड को समय पर निष्पादित करें।
  • शांति बांड में दर्ज सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें और उनका कड़ाई से पालन करें, क्योंकि शर्तों के उल्लंघन पर रिहाई रद्द हो सकती है और जेल भेजा जा सकता है।
  • गलत तरीके से की गई हिरासत को चुनौती देने या प्रशासनिक आदेशों को समझने के लिए बिना देरी किए किसी अनुभवी वकील से कानूनी सलाह लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को हिरासत में क्यों लिया था?

उन्हें कनॉट प्लेस में अपनी पार्टी के एक प्रदर्शन में शामिल होने जाते समय हिरासत में लिया गया था, क्योंकि पुलिस ने उन्हें पहले ही नोटिस देकर नागरिकों के लिए असुविधा पैदा न करने की हिदायत दी थी।

इस कार्रवाई में किन कानूनी धाराओं का इस्तेमाल किया गया?

दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की, जो संभावित अपराध को रोकने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने से संबंधित हैं।

दीपके की रिहाई के लिए क्या शर्त रखी गई है?

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने शर्त रखी है कि दीपके को एक साल तक सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए पीस बांड की शर्तों का पालन करना होगा।

अगर कोई व्यक्ति पीस बांड का उल्लंघन करता है तो क्या होता है?

पीस बांड की शर्तों का उल्लंघन करने पर मजिस्ट्रेट व्यक्ति को हिरासत में भेजने का आदेश दे सकते हैं, जैसा कि CJP के अन्य नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजकर किया गया।

📖 कानूनी शब्दों के मतलब

Preventive Arrest (निवारक गिरफ्तारी)किसी व्यक्ति को कोई अपराध करने या सार्वजनिक शांति भंग करने से रोकने के लिए अपराध होने से पहले ही पुलिस द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारी।
Executive Magistrate (कार्यपालक मजिस्ट्रेट)कानून व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए अधिकृत प्रशासनिक अधिकारी, जो आपराधिक मुकदमों की सुनवाई नहीं बल्कि एहतियाती कानूनी प्रक्रियाएं संभालते हैं।
Peace Bond (शांति बांड)एक तय समय तक अच्छा आचरण रखने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने का कानूनी वचन या मुचलका, जिसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
Judicial Custody (न्यायिक हिरासत)पुलिस की सीधी हिरासत के बजाय किसी मजिस्ट्रेट या अदालत की देखरेख और आदेश के तहत जेल में रखे जाना।
⚠️ यह लेख एक सरल सारांश है, केवल सामान्य जानकारी के लिए। इसे कानूनी सलाह न समझें — अपने मामले के लिए वकील से सलाह लें।
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