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⚖️ हाई कोर्ट 📅 20 अक्टूबर 2026 ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

पीएम की विदेश यात्रा के विमान रिकॉर्ड RTI के तहत नहीं मिलेंगे: दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने CIC के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि वायुसेना के विमानों से हुई प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड RTI के तहत नहीं दिए जा सकते।

⚡ त्वरित सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि भारतीय वायुसेना के विमानों से की गई प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़े 'स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स' की जानकारी सूचना का अधिकार (RTI) के तहत साझा नहीं की जा सकती। जस्टिस अमित महाजन ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस निर्देश को रद्द कर दिया जिसमें यह जानकारी देने को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि केवल जनता का पैसा खर्च होने के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की निजी सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

📌 मुख्य बातें

  1. भारतीय वायुसेना के विमानों से हुई पीएम की यात्राओं के स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स RTI कानून के तहत छूट प्राप्त हैं।
  2. दिल्ली हाई कोर्ट ने वायुसेना को उड़ान के रिकॉर्ड देने का निर्देश देने वाले CIC के आदेश को खारिज कर दिया।
  3. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनता के पैसे के खर्च से ज्यादा राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की शारीरिक सुरक्षा अहम है।

📋 केस एक नज़र में

अदालतदिल्ली हाई कोर्ट
बेंचजस्टिस अमित महाजन
केसCentral Public Information Officer (CPIO), Directorate of Personal Services, Air Headquarters, Indian Air Force v. Central Information Commission & Anr.
तारीखOctober 15
कानून / मुद्दाRight to Information Act की धाराएं 8(1)(a), 8(1)(e) और 8(1)(g)

सरकारी पारदर्शिता और देश की सुरक्षा से जुड़े एक अहम फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि भारतीय वायुसेना के विमानों से की गई प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। अदालत ने केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission) के उस पुराने आदेश को पूरी तरह पलट दिया, जिसमें इन यात्रा दस्तावेजों को जारी करने का निर्देश दिया गया था।

जस्टिस अमित महाजन ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सरकारी खर्चों पर नजर रखना और पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन यह देश की सुरक्षा या राष्ट्र के शीर्ष नेता की व्यक्तिगत सुरक्षा की कीमत पर नहीं हो सकता। फैसले में यह बात दोहराई गई कि जब गोपनीय अभियानों और सुरक्षा रणनीतियों के उजागर होने का जोखिम हो, तो सूचना देने के सामान्य नियमों को पीछे हटना पड़ता है।

पृष्ठभूमि

यह मामला तब शुरू हुआ जब रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के. बत्रा ने सूचना का अधिकार (Right to Information) के तहत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं से जुड़ी जानकारी मांगी। इस अर्जी में 1 अप्रैल 2013 से 5 जून 2018 के बीच वायुसेना के विमानों से की गई उड़ानों, विशेष रूप से 'स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स' (SFR-II) नामक दस्तावेजों का ब्योरा मांगा गया था।

वायुसेना के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) ने RTI कानून के तहत मिलने वाली छूट का हवाला देते हुए यह जानकारी देने से इनकार कर दिया। हालांकि, जुलाई 2020 में केंद्रीय सूचना आयोग ने वायुसेना को निर्देश दिया कि वह आवेदक को संबंधित उड़ान रिकॉर्ड्स की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराए। इसके बाद वायुसेना ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट के सामने वायुसेना ने दलील दी कि इन फ्लाइट रिकॉर्ड्स में यात्रियों के नाम, क्रू मेंबर्स की पहचान, शामिल सुरक्षा एजेंसियां, फ्लाइट कोड और सुरक्षा बलों की तैनाती जैसी बेहद संवेदनशील जानकारियां दर्ज होती हैं। दूसरी तरफ, आवेदक का कहना था कि इन यात्राओं में जनता का पैसा लगा है और वह सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि क्या सरकारी खर्च पर किसी निजी व्यक्ति ने यात्रा की थी।

कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने माना कि केंद्रीय सूचना आयोग का उड़ान संबंधी दस्तावेज जारी करने का फैसला गलत था। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इन दस्तावेजों से लोगों के नाम हटा (Redact) भी दिए जाएं, तब भी समस्या का हल नहीं होगा; क्योंकि बची हुई अधूरी जानकारी को सार्वजनिक रूप से मौजूद अन्य डेटा के साथ जोड़कर सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जस्टिस महाजन ने जोर देकर कहा कि सिर्फ सरकारी धन का इस्तेमाल होने से ही किसी नागरिक को सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाने का अधिकार नहीं मिल जाता:

"सिर्फ इसलिए कि माननीय प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सरकारी धन खर्च हुआ है, ऐसी जानकारी के खुलासे को सही नहीं ठहराया जा सकता जिससे उन यात्राओं के लिए किए गए सुरक्षा इंतजामों पर कोई असर पड़े," कोर्ट ने कहा।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उड़ान के ब्योरे को उजागर करने से सुरक्षा का कोई खतरा पैदा होता है या नहीं, इस बात का आकलन अदालतें अपने स्तर पर नहीं कर सकतीं। यह जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात विशेष सुरक्षा एजेंसियों की है और उनके निर्णय का सम्मान होना चाहिए।

कानून आसान भाषा में

सूचना का अधिकार (RTI) कानून सरकारी दफ्तरों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड हासिल करने का यह अधिकार असीमित नहीं है। देश के अहम हितों की रक्षा के लिए संसद ने इस कानून की धारा 8 (Section 8) के तहत कई छूट (Exemptions) दी हैं।

धारा 8(1)(a) ऐसी जानकारी को उजागर करने से रोकती है जिससे देश की संप्रभुता, अखंडता या सुरक्षा को खतरा पहुंच सकता हो। इसके साथ ही, धारा 8(1)(g) उन जानकारियों को सुरक्षा प्रदान करती है जिनके खुलासे से किसी भी व्यक्ति के जीवन या उसकी शारीरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है, या सुरक्षा के गोपनीय प्रबंध उजागर हो सकते हैं।

हालांकि कुछ मामलों में बड़े जनहित (Public Interest) को देखते हुए जानकारी दी जा सकती है, लेकिन हाई कोर्ट ने सुभाष चंद्र अग्रवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। उस फैसले में साफ किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत जान के खतरे से जुड़ी छूट के मामलों में सिर्फ इसलिए जानकारी नहीं दी जा सकती कि आम जनता की उसमें दिलचस्पी है।

आम लोगों पर असर

आम नागरिकों के लिए यह फैसला साफ करता है कि जब बात सेना के साजो-सामान और शीर्ष नेतृत्व की यात्राओं की हो, तो सरकारी खर्च की जानकारी मांगने की एक सीमा तय है। नागरिक सामान्य सरकारी खर्चों पर पारदर्शिता की मांग तो कर सकते हैं, लेकिन ऐसी कोई जानकारी नहीं मांग सकते जो रक्षा अभियानों और सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़ी हो।

यह फैसला स्पष्ट करता है कि देश के नेतृत्व की निजी सुरक्षा और रक्षा रणनीतियां पारदर्शिता के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता रखती हैं। रक्षा विभाग के जन सूचना अधिकारी ऐसी स्थिति में रिकॉर्ड देने से मना कर सकते हैं, जहां कई जानकारियों को जोड़कर सुरक्षा में कोई सेंध लगाई जा सकती हो।

ऐसी स्थिति में क्या करें

  • यह पहले ही तय कर लें कि आप जिस दस्तावेज की मांग कर रहे हैं, वह सामान्य जनहित का है या उसका संबंध रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र से है।
  • अपनी RTI अर्जी में सवाल बिल्कुल स्पष्ट रखें; पैसेंजर लिस्ट, सुरक्षा इंतजाम या ऑपरेशन में तैनात जवानों की सूची जैसी संवेदनशील बातें न मांगें।
  • भविष्य में वैधानिक अपील (Statutory Appeals) दाखिल करने के लिए अपनी मूल अर्जी, सरकारी जवाब और पावती की रसीदें सुरक्षित रखें।
  • अगर जानकारी खारिज होती है, तो प्रथम अपील (First Appeal) और दूसरी अपील के लिए कानून में तय समय-सीमा (Limitation) का विशेष ध्यान रखें।
  • यदि कोई सरकारी विभाग कानूनी छूट का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार करता है, तो प्रशासनिक और संवैधानिक कानून के जानकार वकील से कानूनी सलाह लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नागरिक RTI के जरिए वायुसेना के विमानों में प्रधानमंत्री के साथ गए यात्रियों की सूची मांग सकते हैं?

नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय वायुसेना के विमानों से हुई प्रधानमंत्री की यात्राओं के स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स सुरक्षित दस्तावेज हैं। यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जानकारी देने से सुरक्षा प्रोटोकॉल और व्यक्तिगत सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

क्या सरकारी पैसा खर्च होने के आधार पर यात्रा का पूरा ब्योरा RTI में मांगा जा सकता है?

नहीं, अदालत ने कहा कि सिर्फ जनता का पैसा खर्च होने से उन जानकारियों को उजागर करने का अधिकार नहीं मिल जाता जिनसे सुरक्षा इंतजामों पर आंच आए। ऐसी स्थितियों में वित्तीय पारदर्शिता से ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा को रखा जाता है।

क्या सुरक्षाकर्मियों के नाम हटाकर बाकी दस्तावेज RTI में दिए जा सकते हैं?

कोर्ट के अनुसार सिर्फ नाम हटाना (Redact करना) काफी नहीं है, क्योंकि बाकी बची जानकारियों को अन्य सार्वजनिक आंकड़ों के साथ मिलाकर सुरक्षा तंत्र और रणनीति का पता लगाया जा सकता है।

भारतीय वायुसेना ने इन जानकारियों को रोकने के लिए किस कानूनी प्रावधान का सहारा लिया?

वायुसेना ने सूचना का अधिकार कानून की धारा 8 का हवाला दिया, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीयता और किसी व्यक्ति की शारीरिक सुरक्षा को खतरे से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है।

📖 कानूनी शब्दों के मतलब

Special Flight Returns (SFR-II) [स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स]भारतीय वायुसेना द्वारा वीवीआईपी और उच्चस्तरीय सरकारी उड़ानों के लिए तैयार किए जाने वाले आधिकारिक लॉग और परिचालन रिकॉर्ड।
Redact [संपादित/छिपाना]किसी दस्तावेज को साझा करने से पहले उसमें से संवेदनशील, गोपनीय या पहचान से जुड़ी जानकारी को काला करके मिटाने या हटाने की प्रक्रिया।
Central Information Commission (CIC) [केंद्रीय सूचना आयोग]RTI कानून के तहत केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के फैसलों के खिलाफ नागरिकों की अंतिम अपीलों पर सुनवाई करने वाला स्वतंत्र वैधानिक निकाय।
Exemption under Section 8 [धारा 8 के तहत छूट]सूचना का अधिकार कानून में तय वे विशेष श्रेणियां, जिनके तहत सरकारी विभाग राष्ट्रीय सुरक्षा या जनसुरक्षा के आधार पर जानकारी देने से कानूनी तौर पर मना कर सकते हैं।
⚠️ यह लेख एक सरल सारांश है, केवल सामान्य जानकारी के लिए। इसे कानूनी सलाह न समझें — अपने मामले के लिए वकील से सलाह लें।
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