नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026: सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह याचिका उन छात्र प्रदर्शनकारियों की ओर से दायर की गई थी, जिन्होंने NEET परीक्षा में पारदर्शिता, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने छात्रों पर बल प्रयोग किया। मामले का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए किया गया। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मामला लाखों छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, CJI सूर्यकांत ने तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया और टिप्पणी करते हुए कहा, “हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।” जब वकील ने कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो उपलब्ध होने की बात कही, तो CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत के पास ऐसे वीडियो देखने का समय नहीं है।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इसी मुद्दे पर दायर जनहित याचिका (PIL) की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि हर मामले में अदालत को नहीं घसीटा जाना चाहिए।
अब यह मामला नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख को लेकर कानूनी विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि क्या ऐसे मामलों में तत्काल सुनवाई आवश्यक थी या अदालत का निर्णय न्यायिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
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Advocate Sunil Kumar Supreme Court of India
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