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अगर आपकी पुश्तैनी या खरीदी हुई जमीन को अचानक सरकारी अधिकारी “पब्लिक लैंड” या “बिहार सरकार की जमीन” बताकर जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

हाल ही में पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि लंबे समय से चली आ रही (Long Standing) जमाबंदी को राजस्व अधिकारी अपने स्तर पर रद्द नहीं कर सकते। यदि सरकार को किसी जमीन पर दावा करना है, तो उसे सिविल कोर्ट में टाइटल सूट दायर करना होगा।

क्या था पूरा मामला?

मामले में कई याचिकाकर्ताओं की वर्षों पुरानी जमाबंदी को यह कहते हुए रद्द करने की कोशिश की गई कि संबंधित जमीन पोखर” (तालाब) और सरकारी भूमि है।

जबकि—

  • पुराने सर्वे रिकॉर्ड (Cadastral Survey) में जमीन धनहर (खेती योग्य भूमि) दर्ज थी।
  • वर्षों से उस जमीन की जमाबंदी चल रही थी।
  • नियमित रूप से लगान (रसीद) कट रही थी।
  • जमीन पर निजी कब्जा भी था।

इसके बावजूद अधिकारियों ने रिपोर्ट के आधार पर जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

पटना हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा—

वर्षों पुरानी जमाबंदी (Long Standing Jamabandi) को

  • Circle Officer
  • DCLR
  • ADM
  • DM
  • Commissioner

अपने प्रशासनिक आदेश से रद्द नहीं कर सकते।

यदि सरकार का दावा है कि जमीन सरकारी है, तो केवल एक रास्ता है—

सिविल कोर्ट में Title Suit दाखिल किया जाए।

बिना नोटिस जमाबंदी रद्द करना पूरी तरह अवैध

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि

यदि किसी व्यक्ति की जमाबंदी बिना नोटिस दिए रद्द कर दी जाती है, तो यह Natural Justice का उल्लंघन है।

यानी—

पहले नोटिस देना होगा।

सुनवाई करनी होगी।

फिर कानून के अनुसार निर्णय होगा।

बिना सुनवाई किसी की जमीन छीनना संविधान के विरुद्ध है।

अगर जमीन मालिक की मृत्यु हो जाए तो?

मामले में यह भी सामने आया कि

जिस व्यक्ति के नाम जमाबंदी थी, उसकी मृत्यु हो चुकी थी।

फिर भी अधिकारियों ने मृत व्यक्ति के नाम पर कार्रवाई जारी रखी।

हाईकोर्ट ने इसे भी गलत माना।

कोर्ट ने कहा—

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है तो

उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाकर नोटिस देना अनिवार्य है।

अगर नोटिस नहीं मिला तो क्या करें?

यह फैसला आम लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत है।

यदि—

  • बिना नोटिस आपकी जमाबंदी रद्द हुई है
  • सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया
  • अचानक जमीन को सरकारी घोषित कर दिया गया

तो आपको विभाग के सभी अपील स्तरों पर जाने की मजबूरी नहीं है।

आप सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

पोखर” लिख देने से क्या जमीन सरकारी हो जाती है?

कई मामलों में पुराने रिकॉर्ड में गलती से जमीन की प्रकृति बदल दी गई।

जैसे—

  • धनहर
  • खेत
  • रैयती भूमि

को बाद के रिकॉर्ड में “पोखर” दर्ज कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने माना कि केवल रिकॉर्ड में ऐसी एंट्री होने भर से वर्षों से चली आ रही निजी जमाबंदी स्वतः समाप्त नहीं हो जाती।

लंबे समय से चल रही जमाबंदी का क्या महत्व है?

यदि—

  • 25–30 वर्षों से अधिक समय से जमाबंदी चल रही हो,
  • लगातार रसीद कट रही हो,
  • कब्जा बना हुआ हो,

तो ऐसी जमाबंदी को प्रशासनिक अधिकारी आसानी से समाप्त नहीं कर सकते।

संविधान क्या कहता है?

भारत के संविधान का अनुच्छेद 300A प्रत्येक नागरिक को संपत्ति के अधिकार का संरक्षण देता है।

सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में कह चुका है कि

भूमि (Land) व्यक्ति के जीवन और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिकार है।

इसलिए किसी नागरिक को कानून की उचित प्रक्रिया अपनाए बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

इस फैसले से बिहार के लाखों लोगों को राहत

बिहार में हजारों ऐसे मामले लंबित हैं, जहाँ—

  • पुश्तैनी जमीन
  • खरीदी गई जमीन
  • वर्षों पुरानी जमाबंदी

को सरकारी भूमि बताकर विवाद पैदा किया गया।

पटना हाईकोर्ट का यह फैसला ऐसे सभी लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

यदि आपकी जमीन का भी ऐसा मामला है

यदि—

✅ आपकी जमाबंदी वर्षों पुरानी है

✅ बिना नोटिस जमाबंदी रद्द कर दी गई है

✅ आपकी निजी जमीन को सरकारी भूमि बताया जा रहा है

✅ राजस्व अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं

तो तुरंत अनुभवी अधिवक्ता से कानूनी सलाह लें और अपने अधिकारों की रक्षा करें।

कानूनी सलाह के लिए संपर्क करें

Advocate Sunil Kumar

Supreme Court of India

📞 +91 72610 69333

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