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⚖️ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया 📅 29 अक्टूबर 2026 ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट: वकील के बेटे की बदतमीजी पर जज सख्त, स्टाफ से मिलने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट के जज ने वकील के बेटे द्वारा महिला कोर्ट स्टाफ से अभद्रता के बाद एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के सीधे संपर्क करने पर सख्त पाबंदी लगा दी है।

⚡ त्वरित सारांश

सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (Advocate on Record) के कोर्ट अधिकारियों से सीधे संपर्क करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला तब आया जब एक वकील के बेटे ने महिला कोर्ट स्टाफ के साथ फोन पर गाली-गलौज की। जज ने इस पर सख्त नाराजगी जताई और सुनवाई के बाद बातचीत के नए नियम लागू किए।

📌 मुख्य बातें

  1. केस की सुनवाई खत्म होने के बाद अब एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कोर्ट अधिकारियों के पास नहीं जा सकेंगे।
  2. यह सख्त कदम एक वकील के बेटे द्वारा कोर्ट स्टाफ के साथ गाली-गलौज और अभद्रता के बाद उठाया गया है।
  3. जज ने कोर्ट के सभी कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक और शालीन व्यवहार बनाए रखने पर जोर दिया।

📋 केस एक नज़र में

अदालतसुप्रीम कोर्ट
बेंचजस्टिस संजय कुमार
तारीख2026-10-29
कानून / मुद्दाएडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (Advocate on Record)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) में जस्टिस संजय कुमार ने एक बेहद कड़ा निर्देश जारी करते हुए एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (Advocates on Record) के सुनवाई के बाद कोर्ट अधिकारियों के पास जाने पर रोक लगा दी है। यह सख्त फैसला एक वकील के बेटे द्वारा कोर्ट स्टाफ के साथ की गई बेहद आपत्तिजनक हरकत के बाद लिया गया है।

जज ने कोर्ट के कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा करने और अदालत में एक गरिमापूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए यह तुरंत कार्रवाई की। यह कदम पेशेवर आचरण (Professional Conduct) की अहमियत को रेखांकित करता है और यह संदेश देता है कि कोर्ट स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

यह मामला कोर्ट नंबर 8 में मामलों के मेंशनिंग (Mentioning) के दौरान सामने आया। जानकारी के अनुसार, एक वकील के बेटे ने अदालत की एक महिला अधिकारी को फोन किया और उनके साथ बेहद अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की।

जब यह घटना जस्टिस संजय कुमार के संज्ञान में लाई गई, तो उन्होंने कोर्ट स्टाफ के प्रति दिखाए गए इस अनादर पर गहरा रोष और चिंता जताई। जज ने सीधे तौर पर संबंधित एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड को संबोधित किया और उनके बेटे के आचरण तथा परवरिश पर सवाल खड़े किए।

कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस संजय कुमार ने वकील के बेटे द्वारा इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार पूरी तरह से अस्वीकार्य है और यह संबंधित व्यक्ति के चरित्र को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर हैरानी और गुस्सा जताया कि किसी की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वह अपनी सरकारी जिम्मेदारी निभा रही एक महिला अधिकारी से इस तरह बात करे।

इस दुर्व्यवहार पर जज ने तुरंत प्रभाव से नए नियम लागू करने का ऐलान किया। उन्होंने साफ कर दिया कि अब से एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड की व्यक्तिगत उपस्थिति (Physical Appearance) केवल केस खत्म होने तक ही सीमित रहेगी। इसके साथ ही, सुनवाई के बाद केस से जुड़े मामलों को लेकर कोर्ट अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से या फोन पर किसी भी तरह की बातचीत करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।

अब, आपके इस आचरण के परिणाम स्वरूप, आज से सभी फिजिकल अपीयरेंस केस खत्म होते ही तुरंत दे दी जाएंगी। कोई भी मेरे कोर्ट अधिकारियों से इस बारे में बात नहीं करेगा—न मिलकर और न ही फोन पर। कोई भी उनके पास नहीं जाएगा और न ही उनसे संपर्क करेगा।

जस्टिस कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि कोर्ट के कर्मचारी पूरी निष्ठा और मेहनत से अपना काम करते हैं, इसलिए वे सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस अशोभनीय व्यवहार की वजह से सुबह-सुबह ही उनका पारा चढ़ गया।

कानून आसान भाषा में

भले ही यह आदेश एक खास घटना के बाद दिया गया हो, लेकिन यह वकीलों और उनसे जुड़े लोगों के लिए तय पेशेवर आचार संहिता (Professional Conduct) के बुनियादी सिद्धांतों से जुड़ा है। वकीलों से उम्मीद की जाती है कि वे अदालत की गरिमा और शिष्टाचार (Decorum) को बनाए रखें। यह जिम्मेदारी केवल उनके अपने आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यह भी देखना होता है कि उनके मुवक्किल या परिवार के सदस्य भी कोर्ट स्टाफ का अनादर न करें।

कोर्ट अधिकारी न्याय प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद जरूरी कड़ी होते हैं। अपने काम के सिलसिले में उन्हें वकीलों, वादकारियों (Litigants) और आम जनता से बातचीत करनी पड़ती है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि सभी पक्ष इन अधिकारियों के साथ शालीनता, विनम्रता और पेशेवर तरीके से पेश आएं।

आम लोगों पर असर

इस निर्देश का सीधा असर एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड और उनके मुवक्किलों पर पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद, वकील प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक जानकारी के लिए सीधे कोर्ट अधिकारियों के पास जाने के बजाय तय आधिकारिक माध्यमों या रजिस्ट्री का सहारा लेंगे।

एक आम वादकारी या मुवक्किल (Litigant) के नजरिए से देखें तो अदालत परिसर में बेहतर और अधिक सम्मानजनक माहौल बनने से उन्हें ही फायदा होगा। जब कोर्ट स्टाफ बिना किसी दबाव या दुर्व्यवहार के सुरक्षित महसूस करेगा, तो न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े हर व्यक्ति के लिए काम का अनुभव अधिक सहज और पारदर्शी बनेगा।

ऐसी स्थिति में क्या करें

  • अदालत के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ हमेशा शालीनता और सम्मान से बात करें।
  • यह सुनिश्चित करें कि आपके साथ कोर्ट आने वाले परिवार के सदस्य या परिचित भी अदालत की गरिमा का पूरा ख्याल रखें।
  • अपने केस से जुड़ी सभी कानूनी बातचीत और कागजी कार्रवाई का उचित रिकॉर्ड अपने पास रखें।
  • यदि आपको किसी प्रक्रिया में कोई समस्या या अनुचित व्यवहार दिखता है, तो विवाद करने के बजाय शिकायत दर्ज करने के आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें।
  • अदालत के भीतर सही आचरण और कानूनी नियमों की जानकारी के लिए हमेशा अपने वकील से सलाह लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जज ने वकीलों के कोर्ट स्टाफ से मिलने पर रोक क्यों लगाई?

यह फैसला तब लिया गया जब एक वकील के बेटे ने फोन पर महिला कोर्ट अधिकारी के साथ गाली-गलौज और अभद्रता की, जिसे कोर्ट की गरिमा का गंभीर उल्लंघन माना गया।

सुनवाई के बाद वकीलों के लिए क्या नए नियम तय किए गए हैं?

एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अब केस की सुनवाई समाप्त होने के बाद कोर्ट अधिकारियों से न तो व्यक्तिगत रूप से मिल सकते हैं और न ही फोन पर बात कर सकते हैं।

क्या इस आदेश का असर वकील और मुवक्किल की बातचीत पर पड़ेगा?

नहीं, यह आदेश केवल वकीलों और कोर्ट स्टाफ के बीच के संपर्क पर लागू होता है। आपके और आपके वकील के आपसी संबंधों या बातचीत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

कोर्ट कर्मचारियों के सम्मान को इतना जरूरी क्यों माना गया?

कोर्ट कर्मचारी न्याय प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। जज ने साफ किया कि वे पूरी निष्ठा से काम करते हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार या अपमान किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

📖 कानूनी शब्दों के मतलब

Advocate on Record (एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड)सुप्रीम कोर्ट में किसी पक्षकार की ओर से वकालतनामा दायर करने और केस की पैरवी के लिए अधिकृत विशेष वकील।
Mentioning (मेंशनिंग)जज के सामने किसी केस को जल्द सूचीबद्ध (Urgent Listing) कराने या प्रक्रिया से जुड़ी गुहार लगाने के लिए संक्षिप्त में बात रखना।
Decorum (अदालती शिष्टाचार)अदालत कक्ष और कानूनी कार्यवाही के दौरान सभी से अपेक्षित मर्यादित, सभ्य और अनुशासित व्यवहार।
Litigant (वादकारी/मुवक्किल)वह व्यक्ति जो अदालत में चल रहे किसी मुकदमे या कानूनी विवाद में एक पक्षकार होता है।
⚠️ यह लेख एक सरल सारांश है, केवल सामान्य जानकारी के लिए। इसे कानूनी सलाह न समझें — अपने मामले के लिए वकील से सलाह लें।
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