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⚖️ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया 📅 26 अक्टूबर 2026 ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, वोटर लिस्ट में बदलाव के फैसले सर्वसम्मति से हुए

चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वोटर लिस्ट में सुधार से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

⚡ त्वरित सारांश

चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा है कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए थे। यह उन आरोपों का खंडन करता है जिनमें कहा गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसले लिए थे। ECI ने अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और संशोधन के दौरान इस्तेमाल किए गए घोषणा पत्र के बारे में भी स्पष्टीकरण दिया है।

📌 मुख्य बातें

  1. ECI का कहना है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए, एकतरफा कार्रवाई के दावों को खारिज किया।
  2. आंतरिक नोट आयोग के आधिकारिक फैसले नहीं होते; केवल अंतिम आदेश ही फैसले माने जाते हैं।
  3. फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया; आवेदकों को पिछली लिस्टों से जोड़ने के लिए एक अलग घोषणा पत्र का इस्तेमाल किया गया।

📋 केस एक नज़र में

अदालतसुप्रीम कोर्ट
केसRakesh Kumar Singh v. Election Commission of India
तारीख2026-10-26
कानून / मुद्दामुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पद की अवधि) अधिनियम, 2023; निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960

चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) से संबंधित सभी फैसले इसके सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए थे। यह उस याचिका के जवाब में आया है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज और ECI के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए गए थे।

ECI के इस जवाब का मकसद यह स्पष्ट करना है कि किसी भी सदस्य ने एकतरफा फैसले नहीं लिए, खासकर वोटर लिस्ट में सुधार के संबंध में। यह मामला भारत में चुनावी प्रक्रिया की निष्ठा और पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के कुछ कार्यों और फैसलों को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चिंता जताई गई थी।

विशेष रूप से, ऐसे आरोप लगाए गए थे कि SIR प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय सभी चुनाव आयुक्तों की पूरी सहमति के बिना लिए गए थे, भले ही आपत्तियां दर्ज की गई थीं। ये आरोप एक समाचार पत्र की रिपोर्ट से उपजे थे।

कोर्ट ने क्या कहा

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को दृढ़ता से खारिज कर दिया है। आयोग ने कहा कि SIR प्रक्रिया से संबंधित सभी आदेश आयोग के सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय थे।

ECI ने स्पष्ट किया कि किसी फाइल को प्रोसेस करते समय किए गए आंतरिक नोट, प्रश्न या सुझाव आयोग के आधिकारिक फैसले नहीं माने जाते। केवल अंतिम स्वीकृत आदेश ही आयोग के निर्णय का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ECI ने कहा कि SIR से संबंधित 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 की तीनों आदेश आयोग के सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय थे।

आयोग ने फॉर्म 6 के मुद्दे को भी संबोधित किया, जो मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक फॉर्म है। आयोग ने इस बात से इनकार किया कि SIR आदेशों के माध्यम से फॉर्म 6 में संशोधन किया गया था, और समझाया कि ऐसे फॉर्म में संशोधन करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।

ECI ने स्पष्ट किया कि आवेदकों को पिछली वोटर लिस्टों से जोड़ने में मदद करने के लिए एक अलग घोषणा पत्र पेश किया गया था, और यह वैधानिक फॉर्म 6 का संशोधन नहीं था। भ्रम से बचने के लिए, एक निश्चित तारीख से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को फॉर्म 6 और SIR घोषणा पत्र में अलग कर दिया जाएगा।

इसके अलावा, ECI ने अदालत को सूचित किया कि जिन मतदाताओं के नाम पिछली लिस्टों से स्वचालित रूप से नहीं जोड़े जा सके, उन्हें आम तौर पर व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। बूथ लेवल अधिकारी उनके घरों से आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे।

कानून आसान भाषा में

ECI के जवाब में आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला गया है। इसमें बताया गया है कि आंतरिक चर्चाएं और नोट्स प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन वे अंतिम, आधिकारिक फैसलों से अलग हैं।

चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले कानून में आम तौर पर यह आवश्यक होता है कि निर्णय सर्वसम्मति से या, यदि वह संभव न हो, तो बहुमत से लिए जाएं। यह सुनिश्चित करता है कि चुनावी मामलों पर सामूहिक रूप से विचार किया जाए।

ECI ने फॉर्म 6 जैसे वैधानिक फॉर्म और चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान उपयोग किए जाने वाले घोषणा पत्रों या अन्य दस्तावेजों के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया। वैधानिक फॉर्म कानून द्वारा निर्धारित होते हैं, और उनके संशोधन के लिए विशिष्ट कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

आम लोगों पर असर

ECI द्वारा यह स्पष्टीकरण आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो मतदाता हैं या बनना चाहते हैं। यह उन्हें आश्वस्त करता है कि वोटर लिस्ट को संशोधित करने की प्रक्रिया सामूहिक निर्णय लेने के माध्यम से की जाती है।

जिन मतदाताओं के नाम नहीं जुड़ पाते, उनकी सुनवाई के संबंध में दी गई व्याख्या प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखती है। यह बताता है कि ECI प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता कम हो जाती है, जब तक कि यह बिल्कुल आवश्यक न हो।

फॉर्म 6 और अलग घोषणा पत्र के बीच का अंतर नए आवेदकों के लिए प्रक्रिया को भी स्पष्ट करता है, यह सुनिश्चित करता है कि वे समझें कि कौन सी जानकारी मांगी जा रही है और क्यों।

ऐसी स्थिति में क्या करें

  • अपने आवेदन या किसी भी चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सभी दस्तावेज संभाल कर रखें।
  • किसी भी सबमिशन या कार्रवाई के लिए तारीखों और समय-सीमाओं को नोट करें।
  • यदि आपको कोई नोटिस या प्रश्न प्राप्त होता है, तो तुरंत और सटीक रूप से प्रतिक्रिया दें।
  • यदि प्रक्रिया का कोई भी हिस्सा अस्पष्ट है तो संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लें।
  • यदि आपको लगता है कि आपके अधिकारों पर असर पड़ रहा है या आपको महत्वपूर्ण कठिनाई हो रही है तो किसी कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या चुनाव आयोग ने एकतरफा फैसले लिए?

नहीं, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में कहा है कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन से संबंधित सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। उन्होंने इस आरोप को खारिज कर दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले ही फैसले लिए थे।

आंतरिक नोट और आयोग के फैसलों में क्या अंतर है?

ECI ने स्पष्ट किया कि किसी फाइल को प्रोसेस करते समय आयुक्तों द्वारा किए गए नोट, प्रश्न या सुझाव आधिकारिक फैसले नहीं होते। केवल अंतिम, स्वीकृत आदेश ही आयोग के फैसले माने जाते हैं।

क्या वोटर लिस्ट संशोधन के दौरान फॉर्म 6 में बदलाव किया गया था?

ECI ने फॉर्म 6 में बदलाव करने से इनकार किया है। उन्होंने समझाया कि आवेदकों को पिछली वोटर लिस्टों से जोड़ने में मदद के लिए एक अलग घोषणा पत्र का इस्तेमाल किया गया था, जो कि आधिकारिक फॉर्म 6 में बदलाव से अलग है।

क्या मुझे सुनवाई के लिए उपस्थित होना होगा यदि मेरा नाम पिछली लिस्टों से नहीं जुड़ पाता?

आम तौर पर, जिन मतदाताओं के नाम पिछली वोटर लिस्टों से स्वचालित रूप से नहीं जोड़े जा सकते, उन्हें व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। बूथ लेवल अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे उनके घरों से आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें।

📖 कानूनी शब्दों के मतलब

Special Intensive Revision (SIR)वोटर लिस्ट को अच्छी तरह से अपडेट और संशोधित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा की जाने वाली एक विशेष प्रक्रिया।
Electoral Rollsकिसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में सभी पात्र मतदाताओं की आधिकारिक सूची, जिसे चुनाव आयोग द्वारा बनाए रखा जाता है।
Form 6वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक निर्धारित फॉर्म, आमतौर पर नए मतदाताओं या उन लोगों के लिए जिन्होंने स्थान बदला है।
Unanimous Decisionएक ऐसा निर्णय जिसमें किसी समूह या निकाय के सभी सदस्य परिणाम पर सहमत हों।
⚠️ यह लेख एक सरल सारांश है, केवल सामान्य जानकारी के लिए। इसे कानूनी सलाह न समझें — अपने मामले के लिए वकील से सलाह लें।
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